कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
हाल ही में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांता मजूमदार ने राज्यसभा में बताया कि भारत सरकार "भारत में एआई का विकास करें और एआई को भारत के लिए उपयोगी बनाएं" के विजन को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से केंद्रीय बजट 2023-24 की घोषणा के अनुरूप सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं। ये केंद्र कृषि, टिकाऊ शहर और स्वास्थ्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं।
कृषि क्षेत्र के लिए AI उत्कृष्टता केंद्र का नेतृत्व IIT रोपड़, टिकाऊ शहरों के लिए IIT कानपुर और स्वास्थ्य सेवा के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान IISc बेंगलुरु कर रहा है। इन तीनों केंद्रों के लिए कुल 990 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इन पहलों का मुख्य लक्ष्य अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर AI आधारित स्वदेशी समाधान विकसित करना है, जिससे AI का लाभ आम जनता तक पहुंचे और भारत AI के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्या है?
AI का मतलब आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता है। इसका आशय कंप्यूटर या कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित रोबोट की उस क्षमता से है जिसके द्वारा वह ऐसे काम कर सके जो आमतौर पर मनुष्य अपनी बुद्धि और विवेक से करते हैं।
फिलहाल ऐसी कोई AI प्रणाली नहीं है जो इंसान की तरह हर तरह का काम कर सके। हालांकि कुछ AI सिस्टम ऐसे हैं जो मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले कुछ विशिष्ट कामों को बहुत अच्छे से कर सकते हैं।
AI की विशेषताएँ और घटक:
| डीप लर्निंग : | DLयह तकनीक बड़ी मात्रा में असंरचित डेटा - जैसे टेक्स्ट, चित्र या वीडियो - के माध्यम से मशीन को अपने आप सीखने में मदद करती है। |
| युक्तिसंगत कार्रवाई : | AI की आदर्श विशेषता है कि वह एक विशिष्ट लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तर्क के आधार पर निर्णय ले और काम करे। |
| मशीन लर्निंग ML : | ML, AI का ही एक प्रकार है। इसमें सिस्टम डेटा से पैटर्न सीखता है और अनुभव के आधार पर अपना प्रदर्शन बेहतर बनाता है। |
दरअसल कुलमिलाकर AI का लक्ष्य मशीनों को "सोचने और सीखने" लायक बनाना है ताकि वे इंसानों की मदद से काम को तेज, सटीक और स्मार्ट तरीके से कर सकें।
उत्कृष्ठता केन्द्र से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तत्व
इस विजन को और आगे बढ़ाने के लिए, केन्द्रीय बजट 2025-26 में ₹500 करोड़ के कुल व्यय के साथ शिक्षा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता(AI) में एक उत्कृष्टता केंद्र (COE) की घोषणा की गई थी, जिसे आईआईटी मद्रास में स्थापित किया गया है।
अब तक, वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान, आईआईटी कानपुर को ₹74.39 करोड़, आईआईटी रोपड़ को ₹62.64 करोड़, आईआईएससी बेंगलुरु को ₹69.07 करोड़ और आईआईटी मद्रास को ₹43.00 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
चारों कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्रों (AI-COE) ने शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों तथा सरकारी संगठनों के नेटवर्क के साथ साझेदारी में शोध किया है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता(AI) आधारित मॉडल विकसित किए हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि तथा टिकाऊ शहरों से संबंधित चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सके।
शिक्षा
शिक्षा के लिए एआई उत्कृष्टता केंद्र ने भारतीय भाषाओं को समर्थन देने वाले स्वचालित वाक् पहचान (एएसआऱ), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन(ओसार), मशीन अनुवाद(एमटी) तथा टेक्स्ट-टू-स्पीच(टीटीएस) के लिए मशीन लर्निंग मॉडल विकसित किए हैं।
कृषि
कृषि के लिए एआई उत्कृष्टता केंद्र ने फसलों, कीटों तथा रोगों की पहचान के लिए मॉडल विकसित किए हैं। इसी प्रकार, टिकाऊ शहरों के लिए एआई उत्कृष्टता केंद्र ने वायु प्रदूषण के स्रोतों की पहचान तथा शहरी बाढ़ की पूर्वानुमान प्रणाली के लिए मॉडल विकसित किए हैं।
एआई उत्कृष्टता केंद्रों (AI-COE) की प्रगति की निगरानी बहुस्तरीय प्रशासनिक एवं वित्तीय निगरानी तंत्र के माध्यम से की जाती है। इसमें उद्योग जगत के विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ प्रशासकों से गठित एपेक्स समिति द्वारा नियमित समीक्षा भी शामिल है।
हरेक एआई उत्कृष्टता केंद्र द्वारा स्वतंत्र परियोजना निगरानी एवं समीक्षा समिति (पीएमआरसी) का गठन किया गया है, जो व्यक्तिगत परियोजनाओं की प्रगति पर निगरानी रखता है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय परियोजना प्रबंधन इकाई (सीपीएमयू) द्वारा समय-समय पर बाहरी विषय विशेषज्ञों के माध्यम से समीक्षा आयोजित किया जाता है। इन समीक्षाओं में स्वीकृत लक्ष्यों के अनुरूप प्रौद्योगिकी विकास की प्रगति तथा वित्तीय संसाधनों के उपयोग का मूल्यांकन किया जाता है।
AI के लाभ
AI के उपयोग से कई क्षेत्रों में काम करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है।
| सटीकता: | AI एल्गोरिदम बड़ी मात्रा में डेटा का बहुत सटीकता से विश्लेषण कर सकता है। इससे त्रुटियाँ कम होती हैं और उपचार, पूर्वानुमान तथा निर्णय लेने जैसे कामों में सटीकता बढ़ती है। |
| बेहतर निर्णय लेने की क्षमता: | AI डेटा-आधारित जानकारी और विश्लेषण देता है। यह उन पैटर्न, रुझानों और संभावित जोखिमों को पहचान लेता है जिन्हें इंसान आसानी से नहीं देख पाते, जिससे निर्णय लेना आसान हो जाता है। |
| नवाचार में वृद्धि: | AI नई खोजों को संभव बनाता है। स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में AI की मदद से लगातार नए समाधान और आविष्कार हो रहे हैं। |
| उत्पादकता में वृद्धि: | AI उपकरण और प्रणालियाँ मानव क्षमताओं को बढ़ाती हैं। इससे विभिन्न उद्योगों में काम तेज होता है और उत्पादन तथा उत्पादकता दोनों बढ़ती है। |
| निरंतर सीखने की क्षमता और अनुकूलता: | AI सिस्टम नए डेटा और अनुभवों से लगातार सीखते हैं। ये खुद को समय के साथ बेहतर बनाते हैं और बदलते रुझानों के अनुसार ढल जाते हैं। |
| अन्वेषण और अंतरिक्ष अनुसंधान: | AI अंतरिक्ष अनुसंधान में अहम भूमिका निभाता है। स्वायत्त अंतरिक्ष यान, रोबोट द्वारा अन्वेषण और दूरस्थ एवं खतरनाक जगहों पर डेटा विश्लेषण AI के कारण ही संभव हो पाया है। |
AI से जुड़ी नैतिक चिंताएँ
AI के तेज़ विकास के साथ कई गंभीर नैतिक मुद्दे भी सामने आए हैं:
| डीपफेक और गलत सूचना : | AI-जनित डीपफेक की बढ़ती परिष्कृतता गलत सूचना और भ्रामक सूचना का बड़ा खतरा है। उदाहरण के लिए एक अभिनेत्री के चेहरे वाला वायरल डीपफेक वीडियो इंस्टाग्राम फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए बनाया गया था। इससे तकनीक के दुरुपयोग में नैतिकता की कमी दिखती है। |
| एल्गोरिदम संबंधी पूर्वाग्रह : | पक्षपातपूर्ण डेटा पर प्रशिक्षित AI मौजूदा सामाजिक पूर्वाग्रहों को बढ़ा सकता है। उदाहरण के लिए Stable Diffusion से "गरीब व्यक्ति" की छवि माँगने पर अक्सर अश्वेत लोगों की छवि दिखी। UNESCO की रिपोर्ट: LLM में लैंगिक पूर्वाग्रह, समलैंगिकता-विरोध और नस्लीय रूढ़िवादिता। महिलाएँ = "घर, परिवार" और पुरुष = "व्यवसाय, करियर" से जोड़ी गईं। |
| प्राथमिक स्रोत प्रतिनिधित्व की चुनौती : | AI मुख्यतः अंग्रेजी के द्वितीयक स्रोतों पर निर्भर है। अभिलेखीय दस्तावेज और मौखिक परंपराएँ छूट जाती हैं। परिणामस्वरूप कुछ समाजों और संस्कृतियों का कम या गलत प्रतिनिधित्व। डेटा में पूर्वाग्रह आ जाता है। |
| डेटा गोपनीयता/ निजता : | AI प्रशिक्षण के लिए व्यक्तिगत डेटा का संग्रह निजता उल्लंघन का खतरा पैदा करता है। AI-आधारित निगरानी से नागरिक स्वतंत्रता घट सकती है। उदाहरण: जनरेटिव AI टूल्स इंटरनेट डेटा से परिवार-दोस्तों की जानकारी रख सकते हैं, जिससे पहचान चोरी का डर। |
| ‘ब्लैक बॉक्स’ समस्या : | कई AI मॉडल की निर्णय प्रक्रिया समझना मुश्किल है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में बाधा आती है। उदाहरण के लिए स्वचालित कार दुर्घटना में "किसे बचाया जाए" जैसी नैतिक दुविधा। |
| उत्तरदायित्व का मुद्दा : | AI से नुकसान होने पर जिम्मेदारी तय करना कठिन है। उदाहरण के लिए एयर कनाडा को अपने चैटबॉट द्वारा दी गई गलत जानकारी के लिए उत्तरदायी ठहराया गया। |
| स्वचालन और बेरोज़गारी : | AI से नौकरियों का विस्थापन और आर्थिक असमानता बढ़ने का डर। उदाहरण के लिए WEF के अनुसार 2025 तक AI के कारण ∼85 मिलियन नौकरियाँ समाप्त हो सकती हैं। |
| डेटा स्वामित्व और IPR : | उपयोगकर्ता द्वारा उत्पन्न डेटा का मालिक कौन? AI से बनी कला पर कॉपीराइट, साहित्यिक चोरी और उल्लंघन के सवाल। |
| स्वायत्त हथियार : | घातक बल प्रयोग में मानव की भूमिका कम होने और अनपेक्षित परिणामों की संभावना से जटिल नैतिक-सुरक्षा दुविधाएँ। |
| डिजिटल डिवाइड : | AI तक असमान पहुँच से असमानता बढ़ेगी। उदाहरण के लिए भारत में केवल ∼52% आबादी के पास इंटरनेट, जिससे AI के लाभ सीमित वर्ग तक ही रह सकते हैं। |
| पर्यावरणीय नैतिकता : | AI डेटा सेंटर की ऊर्जा खपत बहुत अधिक है। उदाहरण के लिए Google की 2023 रिपोर्ट में डेटा सेंटर की बिजली खपत 17% बढ़ी। AI के व्यापक उपयोग से यह और बढ़ेगी। |
AI से संबंधित अन्य पहलें
| वैश्विक INDIA AI शिखर सम्मेलन |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक भागीदारी (GPAI) शिखर सम्मेलन |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुरक्षा शिखर सम्मेलन -2023 |
| कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिशन |
| अमेरिका भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता पहल |
निष्कर्ष
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज 21वीं सदी की सबसे परिवर्तनकारी तकनीक बन गई है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने की अपार संभावनाएँ प्रदान करती है। लेकिन इसके साथ डीपफेक, एल्गोरिदम पूर्वाग्रह, डेटा गोपनीयता, बेरोजगारी, डिजिटल डिवाइड और पर्यावरणीय प्रभाव जैसी गंभीर नैतिक चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। इसलिए केवल तकनीकी प्रगति ही काफी नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, निष्पक्षता, जवाबदेही और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित एथिकल AI को अपनाना आवश्यक है। इंडियाAI मिशन, GPAI और US-India AI Initiative जैसी राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहलें इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
अंततः AI का उद्देश्य मानव कल्याण को बढ़ाना और सामाजिक मूल्यों के साथ संरेखित होना चाहिए। यदि AI के विकास को नैतिकता और समावेशिता के साथ संतुलित किया जाए, तो यह न केवल आर्थिक विकास को गति देगा बल्कि एक अधिक न्यायसंगत और सतत भविष्य का निर्माण भी करेगा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) विज्ञान एवं प्रौधोगिकी से संबंधित टॉपिक हैं और यह बीपीएससी (BPSC) मुख्य परीक्षा (Mains) में शामिल सामान्य अध्ययन प्रपत्र-2 से सीधी तौर पर जुड़ा हुआ है। इसके अलावा करेंट अफेयर्स की दृष्टिकोण से प्रीलिम्स(PT) के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
Reference:
Is Artificial Intelligence (AI) part of the BPSC syllabus?
Yes. AI falls under Science & Technology and links directly to General Studies Paper 2 in the BPSC Mains exam. It is also important for Prelims from a current affairs angle.
How many AI Centres of Excellence has India set up, and where?
India has set up four AI Centres of Excellence: agriculture (IIT Ropar), sustainable cities (IIT Kanpur), healthcare (IISc Bengaluru), and education (IIT Madras), with a combined outlay of about ₹990 crore, plus ₹500 crore announced in the 2025-26 Budget for the education centre.
What is the difference between AI and Machine Learning (ML)?
ML is a subset of AI. AI broadly means a machine's ability to perform tasks that normally require human intelligence, while ML specifically refers to systems that learn patterns from data and improve through experience.
What are the main ethical concerns around AI, as highlighted in national and UNESCO reports?
Key concerns include deepfakes and misinformation, algorithmic bias (a UNESCO report flagged gender and racial bias in large language models), data privacy violations, the AI "black box" problem, job displacement, and the environmental cost of AI data centres.
What government initiatives support AI development in India?
Major initiatives include the IndiaAI Mission, the Global Partnership on Artificial Intelligence (GPAI) Summit, the AI Safety Summit 2023, and the US-India AI Initiative.
Which institutes lead India's three original AI Centres of Excellence, and what sector does each focus on?
IIT Ropar leads the centre for agriculture, IIT Kanpur leads sustainable cities, and IISc Bengaluru leads healthcare.
How much funding have the IITs and IISc actually received for their AI Centres of Excellence so far?
As of FY 2025-26 and 2026-27, IIT Kanpur has received Rs 74.39 crore, IIT Ropar Rs 62.64 crore, IISc Bengaluru Rs 69.07 crore, and IIT Madras Rs 43.00 crore.
What AI models has the Education Centre of Excellence at IIT Madras developed?
It has developed machine learning models for automatic speech recognition, optical character recognition, machine translation, and text-to-speech that support Indian languages.
How is the digital divide connected to AI's benefits in India, per the article?
The article notes that only around 52% of India's population has internet access, so AI's benefits risk staying limited to a smaller section of the population unless access is widened.
How is the progress of India's AI Centres of Excellence monitored?
Through a multi-tier administrative and financial oversight system, including an apex committee of industry experts and senior administrators, an independent Project Monitoring and Review Committee (PMRC) at each centre, and periodic reviews by external experts via a Central Project Management Unit (CPMU).






