भारत में Grid-Scale Energy Storage Scheme
चर्चा में क्यों?
4 नवंबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में बड़े स्तर पर बिजली को स्टोर करने और जरूरत के समय उसका उपयोग करने के लिए Grid-Scale Energy Storage Systems (ESS) के विकास हेतु Viability Gap Funding (VGF) योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत कुल 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ₹14,500 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
इन परियोजनाओं में लगभग ₹97,600 करोड़ का कुल निवेश अनुमानित है। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी। इसका उद्देश्य सौर एवं पवन ऊर्जा का बेहतर उपयोग, बिजली की उपलब्धता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। आइये इस ब्लॉग के जरिये इस पूरे सिस्टम को आसानी से समझते हैं तथा इसके लिए दी जा रही Viability Gap Funding (VGF) का मतलब भी जानते हैं.
सबसे पहला सवाल यह कि Grid-Scale Energy Storage System (ESS) क्या है?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए किसी गाँव में एक बड़ा पानी का टैंक है। जब पानी अधिक उपलब्ध होता है, तब उसे टैंक में भरकर रखा जाता है। जब पानी की कमी होती है, तब टैंक से पानी निकालकर उपयोग किया जाता है। Energy Storage System भी इसी तरह काम करता है, लेकिन इसमें पानी के स्थान पर बिजली को स्टोर किया जाता है। जब बिजली अधिक पैदा होती है, तब उसे स्टोर कर लिया जाता है और जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब स्टोर की गई बिजली का उपयोग किया जाता है। यही Energy Storage System का मूल उद्देश्य है: बिजली भंडारण उस समय करना जब वह अधिक उपलब्ध हो और उस समय उपयोग करना जब उसकी जरूरत अधिक हो। सरकारी योजना इसी प्रकार की बड़ी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को विकसित करने पर केंद्रित है।
सरकार की नई योजना में शामिल तकनीकें
सरकार ने 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए तीन प्रकार की तकनीकों को शामिल किया है। बैटरी भण्डारण : 30 GWh पम्प्ड हाइड्रो भण्डारण : 60 GWh अन्य तकनीकें: 2 GWh
(क) बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS): इसमें बड़ी-बड़ी बैटरियों के माध्यम से बिजली भंडारण किया जाता है।
इसमें लिथियम आयन बैटरी का उपयोग किया जाता है। विशेष रूप से Lithium Iron Phosphate (LFP) बैटरियां बड़े स्तर पर उपयोग की जा रही हैं।
(ख) पम्प्ड हाइड्रो भण्डारण (PHS/PSP): यह तकनीक बिजली को पानी की ऊँचाई में स्थित ऊर्जा के रूप में भंडारित करती है।
इसमें सामान्यतः दो जलाशय होते हैं: ऊपरी एवं निचला जलाशय जब बिजली अधिक उपलब्ध होती है तो अतिरिक्त बिजली से पंप चलाए जाते हैं। पानी को निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में पहुँचाया जाता है। और तब पानी ऊँचाई पर जमा हो जाता है और उसमें स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) संचित होती है। जब बिजली की मांग बढ़ती है तो ऊपरी जलाशय से पानी नीचे छोड़ा जाता है। यह पानी टर्बाइन को घुमाता है। फिर टर्बाइन से जनरेटर बिजली पैदा करता है।
(ग) उभरती ऊर्जा भंडारण तकनीक: सरकार ने 2 GWh क्षमता अन्य उभरती ऊर्जा भंडारण तकनीकों के लिए निर्धारित की है।
इसका उद्देश्य भविष्य में नई और बेहतर ऊर्जा भंडारण तकनीकों को विकसित करने के अवसर देना है। जैसे Flow Batteries, Advanced Battery Technologies, अन्य नवीन ऊर्जा भंडारण प्रणालियां. इन तकनीकों का विकास भविष्य में ऊर्जा भंडारण को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
अब बात Viability Gap Funding (VGF) की
- यह इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। Viability Gap Funding (VGF) का अर्थ है ऐसी वित्तीय सहायता जो किसी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण लेकिन शुरुआती लागत के कारण कम लाभकारी परियोजना को व्यवहारिक बनाने के लिए दी जाती है। उदाहरण के लिए कई परियोजनाएं देश के लिए बहुत जरूरी होती हैं, लेकिन उनकी शुरुआती लागत अधिक होने के कारण निजी कंपनियां उनमें निवेश करने से बचती हैं। ऐसी स्थिति में सरकार कुछ वित्तीय सहायता देती है ताकि परियोजना शुरू हो सके और निवेश आकर्षित किया जा सके। यदि सरकार इस परियोजना को व्यवहारिक बनाने के लिए वित्तीय सहायता देती है, तो कंपनी के लिए निवेश करना आसान हो सकता है। यही VGF का मूल विचार है। गौरतलब है कि Energy Storage Systems की शुरुआती लागत काफी अधिक होती है। सरकारी सहायता से परियोजनाओं की लागत का दबाव कम होगा, निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बिजली भंडारण की क्षमता तेजी से विकसित होगी और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। Grid-Scale Energy Storage भारत के लिए महत्त्वपूर्ण भारत तेजी से सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार कर रहा है। लेकिन इन दोनों स्रोतों की एक बड़ी समस्या है-इनसे हर समय समान मात्रा में बिजली नहीं मिलती। (1) सौर ऊर्जा की समस्या: सौर ऊर्जा दिन में पैदा होती है, रात में नहीं। (2) पवन ऊर्जा की समस्या: पवन ऊर्जा हवा की गति पर निर्भर करती है। यदि हवा तेज चलती है, तो बिजली अधिक पैदा होती है। यदि हवा कम चलती है, तो बिजली उत्पादन कम हो जाता है। Energy Storage System इस उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में मदद करता है। (3) बिजली की बढ़ती मांग: भारत में बिजली की मांग बढ़ने के प्रमुख कारण हैं:
- औद्योगीकरण
- शहरीकरण
- इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार
- एयर कंडीशनर और अन्य उपकरणों का बढ़ता उपयोग
- डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा सेंटर इसलिए केवल बिजली पैदा करना पर्याप्त नहीं है। बिजली को सही समय पर उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
योजना में 40% घरेलू सामग्री आवश्यकता महत्वपूर्ण
सरकार ने BESS परियोजनाओं में न्यूनतम 40% घरेलू सामग्री आवश्यकता निर्धारित की है। इसका अर्थ है कि परियोजनाओं में निर्धारित शर्तों के अनुसार कम से कम 40% घरेलू सामग्री का उपयोग करना होगा। इससे भारत में बैटरी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
भारत के लिए इस योजना का महत्व
- नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा: भारत का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करना है। Energy Storage System से अक्षय ऊर्जा को अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है।
2. कोयले पर निर्भरता कम करने में मदद: जब सौर और पवन ऊर्जा से पैदा हुई बिजली को भंडारित करके बाद में उपयोग किया जा सकेगा, तब बिजली की मांग पूरी करने के लिए पारंपरिक बिजली संयंत्रों पर दबाव कम हो सकता है।
3. बिजली ग्रिड की स्थिरता: बिजली उत्पादन और बिजली की मांग के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। Energy Storage System इस संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकता है।
4. ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा और भण्डारण क्षमता बढ़ने से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
5. जलवायु परिवर्तन से मुकाबला: स्वच्छ ऊर्जा का अधिक उपयोग करने से जीवाश्म ईंधन के उपयोग और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालाँकि योजना से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता । ये हैं:
क. उच्च लागत: बैटरी और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं की शुरुआती लागत अधिक ख. तकनीकी चुनौती बैटरी की आयु, दक्षता और सुरक्षा ग.भूमि की उपलब्धता बड़े Pumped Storage Projects के लिए उपयुक्त स्थान घ.पर्यावरणीय प्रभाव जलाशयों और भूमि उपयोग से संबंधित समस्याएँ
भारत में ऊर्जा भंडारण की भविष्य की जरूरत
सरकार के अनुसार भारत को वर्ष 2031-32 तक लगभग 411 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी। नई योजना के तहत 92 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस योजना के अंतर्गत विकसित की जाने वाली क्षमता वर्तमान Grid-Scale Energy Storage क्षमता के लगभग 170% के बराबर होगी।
निष्कर्ष
भारत में Renewable Energy का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित प्रकृति के कारण बिजली को स्टोर करने और जरूरत के समय उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है। Grid-Scale Energy Storage Scheme इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह न केवल अक्षय ऊर्जा के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देगी, बल्कि बिजली ग्रिड की स्थिरता, घरेलू विनिर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को भी मजबूत करेगी।
Reference: The Indian Express



