EDU TERIA Logo
Sign InEnroll Now

पीएम-प्रणाम

PM-PRANAM योजना 2026, जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि, PKVY, NMNF, उर्वरक सब्सिडी, रासायनिक खाद, BPSC करेंट अफेयर्स।

school
Written by Akhilesh Anand
Published: 7 August 20268 min read
पीएम-प्रणाम
Progress
0%
Aa

पीएम-प्रणाम

रसायन और उर्वरक मंत्रालय की राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने हाल ही में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में PM-PRANAM योजना को लेकर बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 2025-26 में दादरा-नगर हवेली, दिल्ली, गोवा, मणिपुर और मिजोरम - इन 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में कमी आई है।

यूरिया, DAP, NPK और MOP की खपत पिछले 3 साल के औसत के मुकाबले 0.18 लाख मीट्रिक टन कम हुई है। इसका मतलब साफ है - इन जगहों पर किसान अब थोड़ा कम रासायनिक खाद इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन एक अहम बात भी सामने आई। सरकार ने कहा कि PM-PRANAM के तहत किसानों/राज्यों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि अभी तक जारी नहीं की गई है।

PM-PRANAM योजना क्या है?

PM-PRANAM का पूरा नाम है: "प्रधानमंत्री योजना फॉर रिस्टोरेशन, अवेयरनेस, नर्चरिंग एंड इम्प्रूवमेंट ऑफ मदर अर्थ"

सीधे शब्दों में - "धरती माता की उर्वरता वापस लाने, जागरूकता बढ़ाने, पोषण देने और उसे बेहतर बनाने की प्रधानमंत्री योजना" है।

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल की समिति (सीसीईए) ने 28 जून 2023 को वर्ष 2023-24 से 2025-26 की अवधि यानी 3 साल के लिए के लिए इस योजना की मंजूरी दी थी।

योजना का उद्देश्य सिंपल है - राज्य जितनी रासायनिक खाद कम इस्तेमाल करेंगे, सरकार उन्हें उतना प्रोत्साहन देगी। उस पैसे से वो जैविक खाद, मिट्टी सुधार और किसानों को जागरूक करने का काम कर सकते हैं।

रासायनिक खाद का इस्तेमाल कम करना। सरकार चाहती है कि राज्य यूरिया-DAP की जगह जैविक खाद, गोबर खाद और दूसरे विकल्प अपनाएं।

सरकार का लक्ष्य है 20,000 करोड़ रुपए की उर्वरक सब्सिडी बचाना। इससे खेती भी टिकाऊ होगी और मिट्टी भी बचेगी।

इसके लिए iFMS - इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर्स मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है। इसी से पता चलेगा कि किस राज्य ने कितनी खाद कम इस्तेमाल की।

PM-PRANAM योजना कैसे काम करती है?

ये योजना पूरे देश में लागू है। अगर कोई राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पिछले 3 साल के औसत के मुकाबले यूरिया, DAP, NPK, MOP जैसी रासायनिक खाद की खपत कम करता है, तो उसे इनाम मिलता है।

बचने वाली सब्सिडी का 50% प्रोत्साहन के रूप में मिलता है। इसमें से 95% पैसा सीधे राज्य को और 5% केंद्र के पास रहता है।

राज्य को मिले 95% में से 65% पैसा खेती से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं और केंद्र की योजनाओं पर लगेगा। बाकी 30% पैसा किसानों को जागरूक करने, प्रचार और दूसरी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होगा।

सरकार ने प्रमाणित जैविक खाद के बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं:-

परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) :-

2015-16 से पूरे देश में चल रही है। इसके तहत 3 साल में किसानों को 31,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद मिलती है, जिसमें से 15,000 रुपये सीधे किसानों के खाते में जैविक खाद और इनपुट के लिए भेजे जाते हैं।

इस योजना का फोकस छोटे और सीमांत किसानों को जोड़कर "जैविक क्लस्टर" बनाना है ताकि उत्पादन से लेकर प्रमाणन और बिक्री तक पूरी मदद मिल सके। अब तक 18.93 लाख हेक्टेयर जमीन को इसके दायरे में लाया जा चुका है, जिससे 33.63 लाख किसानों को फायदा हुआ है और केंद्र सरकार 2811.36 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है।

MOVCDNER :-

पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट सिर्फ पूर्वोत्तर राज्यों के लिए है। इसमें 3 साल में 46,500 रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाते हैं। इसमें भी 15,000 रुपये सीधे किसान को मिलते हैं और बाकी रकम किसान उत्पादक संगठन बनाने, प्रसंस्करण और मार्केटिंग जैसी चीजों पर खर्च होती है।

 अब तक 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जैविक खेती के अंतर्गत आया है और 2.74 लाख किसानों को इसका लाभ मिला है। केंद्र ने इस पर 1548.62 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। दोनों योजनाएं राज्य सरकारों के जरिए चलाई जाती हैं और इनका मकसद रासायनिक खाद घटाकर जैविक खेती को बढ़ावा देना है।

प्राकृतिक कृषि पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएनएफ)

सरकार ने 25 नवंबर 2024 को राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन NMNF शुरू किया है। इसका मकसद है खेती को पूरी तरह रसायन मुक्त बनाना और इसे पशुपालन, विविध फसलों और पारंपरिक भारतीय खेती के ज्ञान से जोड़ना। इस मिशन पर 2,481 करोड़ खर्च होंगे, जिसमें केंद्र का हिस्सा 1,584 करोड़ और राज्यों का 897 करोड़ है।

ये मार्च 2026 तक चलेगा। जो किसान प्राकृतिक खेती अपनाएंगे उन्हें 2 साल तक हर साल 4,000 प्रति एकड़ तक का प्रोत्साहन मिलेगा।अब तक 10.32 लाख हेक्टेयर में 18,893 क्लस्टर बन चुके हैं और 20.93 लाख किसान इससे जुड़े हैं। जमीन पर मदद के लिए 33,257 कृषि सखियों को ट्रेनिंग दी गई और 7,601 जैव-इनपुट केंद्र खोले गए।

 साथ ही 33.89 लाख किसानों को जागरूक किया गया और 18.13 लाख मिट्टी के नमूने जांचे गए। प्रमाणन के लिए NFCS पोर्टल पर 22.47 लाख से ज्यादा किसानों ने रजिस्टर किया है, जिनमें से 14.43 लाख को प्रमाणपत्र भी मिल चुका है। ICAR ड्रिप फर्टिगेशन और गोबर खाद, वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक खादों को भी बढ़ावा दे रहा है ताकि मिट्टी की सेहत सुधरे और किसान की लागत घटे।

 प्राकृतिक कृषि मिशन NMNF के सामने मुख्य चुनौतियां:

उपज और आय की चिंता: किसान सबसे पहले सोचते हैं कि रासायनिक खाद छोड़ने से शुरू के 2-3 साल में उपज कम न हो जाए। इस डर की वजह से कई लोग नई खेती अपनाने से हिचकते हैं।

जैव-इनपुट की उपलब्धता: गोबर, जीवामृत, बीजामृत जैसी खाद हर जगह आसानी से और सही गुणवत्ता में नहीं मिल पाती। 7,601 BRC केंद्र अभी कम हैं।बाजार और प्रमाणन: "प्राकृतिक" का सही दाम दिलाना और NFCS से प्रमाणन कराना अभी धीमा है। बिना अच्छे बाजार के किसान को प्रोत्साहन का फायदा पूरा नहीं मिलता।

जागरूकता और ट्रेनिंग: 33 हजार कृषि सखियां काफी हैं, लेकिन 20 लाख+ किसानों तक वैज्ञानिक तरीके से प्राकृतिक खेती पहुंचाना एक बड़ा काम है। पुरानी आदतें बदलने में समय लगता है।

 प्राकृतिक कृषि मिशन NMNF की सफलता इस बात पर टिकी है कि किसान को "लागत कम, उपज स्थिर और बाजार अच्छा" तीनों एक साथ मिलें।

आगे की राह:

क्लस्टर को मजबूत करना: बने हुए 18,893 क्लस्टरों में FPO और BRC के जरिए बीज, खाद और बिक्री की पूरी चेन खड़ी करनी होगी।

बाजार जोड़ना: सरकारी खरीद, ई-कॉमर्स और ब्रांडिंग से प्राकृतिक उत्पादों को बेहतर दाम दिलाना जरूरी है, तभी 4,000 का प्रोत्साहन असर दिखाएगा।

विज्ञान + परंपरा: ICAR और कृषि विज्ञान केंद्रों को क्षेत्र के हिसाब से पैकेज देने होंगे और कृषि सखियों को फ्रंटलाइन वर्कर बनाना होगा।

निष्कर्ष:

आखिर में बात सीधी सी है। चाहे PM-PRANAM हो, PKVY, MOVCDNER या नया NMNF मिशन - सरकार की कोशिश एक ही है: मिट्टी को जिंदा रखो, किसान की लागत कम करो और खेती को आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाओ। शुरुआत अच्छी हुई है। लाखों हेक्टेयर जमीन जैविक और प्राकृतिक खेती के दायरे में आई है, करोड़ों रुपये भी खर्च हुए हैं। लेकिन असली जीत तब होगी जब किसान दिल से कहेगा - "हां, रसायन कम करने से मेरी फसल भी बची और मेरी जेब पर बोझ भी नहीं पड़ा।" इसके लिए उसे समय पर बीज-खाद, सही दाम और भरोसा चाहिए।अगर सरकार नीति बनाए, राज्य जमीन पर उतारे और किसान आगे बढ़े - तो "कम जहर, ज्यादा जान" वाली खेती सिर्फ कागजों पर नहीं, हर खेत में दिखेगी।

जैविक खेती मुख्य रूप से बीपीएससी (BPSC) की मुख्य परीक्षा में GS Paper-2 (अर्थव्यवस्था और भूगोल) तथा कृषि (Agriculture) वैकल्पिक विषय का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Reference:

1. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2294423&reg=48&lang=2

What is the full form and meaning of PM-PRANAM?

PM-PRANAM stands for Pradhan Mantri Yojana for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth, aimed at restoring soil fertility and creating awareness about reducing chemical fertilizer use.

When was PM-PRANAM approved and for what period?

The Cabinet Committee on Economic Affairs approved the scheme on 28 June 2023 for a three-year period covering 2023-24 to 2025-26.

How does PM-PRANAM incentivize states?

States that reduce chemical fertilizer consumption below the average of the previous three years receive 50% of the saved subsidy as an incentive, with 95% of that amount going directly to the state and 5% retained by the centre.

What subsidy savings target has the government set under PM-PRANAM?

The government's target under PM-PRANAM is to save 20,000 crore rupees in fertilizer subsidy.

Which states reduced chemical fertilizer use in 2025-26?

According to the government, Dadra-Nagar Haveli, Delhi, Goa, Manipur, and Mizoram recorded a decline in chemical fertilizer use in 2025-26, with consumption down by 0.18 lakh metric tonnes compared to the previous three-year average.

What is the iFMS system used for?

The Integrated Fertilizers Management System (iFMS) is used to track and determine how much chemical fertilizer each state has reduced.

What is PKVY and what has it achieved?

The Paramparagat Krishi Vikas Yojana, running nationwide since 2015-16, gives farmers 31,500 rupees per hectare over 3 years for organic farming. It has covered 18.93 lakh hectares and benefited 33.63 lakh farmers so far.

What is the National Mission on Natural Farming (NMNF)?

Launched on 25 November 2024 with an outlay of 2,481 crore rupees, NMNF promotes chemical-free farming and gives participating farmers 4,000 rupees per acre annually for 2 years. It has covered 10.32 lakh hectares through 18,893 clusters so far.

What challenges does natural farming adoption face?

Key challenges include farmers' fear of reduced yield and income in the initial 2-3 years, limited availability of quality bio-inputs, slow market development and certification, and the difficulty of training over 20 lakh farmers with only about 33,000 Krishi Sakhis.

Is PM-PRANAM relevant to the BPSC syllabus?

Yes, as an Economy-related agricultural scheme, PM-PRANAM is relevant to GS Paper-3 in the BPSC syllabus.

Comments

Loading comments...

Related Articles

Suggested Courses

Trending
Titan Plus Batch 2
BPSC CCE

Titan Plus Batch 2

Trending
Titan Batch 2
BPSC CCE

Titan Batch 2