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अल नीनो : कम बारिश का पूर्वानुमान

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Written by Akhilesh Anand
Published: 11 August 20269 min read
अल नीनो : कम बारिश का पूर्वानुमान
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अल नीनो : कम बारिश का पूर्वानुमान

हाल ही में पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि आईएमडी ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के लिए सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वानुमान के मुताबिक इस साल देश में औसत से लगभग 10% कम बारिश हो सकती है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने पहले चरण के दीर्घकालिक पूर्वानुमान में अनुमान लगाया था कि मौसमी बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज यानी एलपीए का 92% ±5% रहेगी। इसके बाद दूसरे चरण में इसे संशोधित करके एलपीए का 90% ±4% कर दिया गया। आईएमडी ने अल नीनो की स्थिति पर भी जानकारी दी है।

अल नीनो क्या है?

  • अल-नीनो की खोज सबसे पहले पेरू के मछुआरों ने की थी, जब उन्होंने देखा कि क्रिसमस के आसपास पेरू के तट से दूर समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है।
  • स्पेनिश प्रवासियों ने इसे "अल-नीनो" नाम दिया, जिसका स्पेनिश में अर्थ "छोटा बच्चा" होता है। वैज्ञानिक रूप से अल-नीनो, अल-नीनो दक्षिणी दोलन यानी ENSO (El Nino Southern Oscillation- ENSO) का गर्म चरण है।
  • इस दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट के पास समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से कम से कम 0.5°C ज्यादा हो जाता है।
  • 2015-2016 की अल-नीनो घटना में यह अंतर 3°C तक पहुंच गया था। अल-नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों, खासकर भारत में गर्मी बढ़ जाती है और मानसून की बारिश सामान्य से कम हो जाती है।
  • यह घटना हर 2 से 7 साल के बीच अनियमित रूप से आती है और इसका सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है। जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार अल-नीनो के साथ-साथ "दक्षिणी दोलन" भी होता है, जिसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के ऊपर वायुदाब में बदलाव आता है।

रिपोर्ट में क्या है?

आंकड़ों के अनुसार 1950 के बाद अब तक 16 बार अल नीनो आया है, जिनमें से 7 बार भारतीय मानसून में बारिश सामान्य से कम रही। हालांकि हाल के वर्षों में देखा गया है कि मानसून के शुरुआती महीनों की तुलना में सितंबर में अल नीनो और बारिश के बीच एक मजबूत उल्टा संबंध है, यानी अल नीनो के दौरान सितंबर की बारिश घट जाती है।

आईएमडी ने अपने मौसमी पूर्वानुमानों में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना का भी संकेत दिया, जिससे संबंधित हितधारकों को तैयारी और योजना बनाने के लिए पहले से जानकारी मिल सके।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2026 में अल नीनो के असर से निपटने के लिए राज्यों को जिले-वार जोखिम और असर के आकलन का कोई अध्ययन या दिशानिर्देश जारी नहीं किया है।

अन्य प्रमुख तथ्य

एमओईएस का भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), 2026 के लिए मौसम के हिसाब से और कम से मध्यम अवधि के प्रायोगिक पूर्वानुमान के आधार पर, कृषि और बांध प्रबंधन विभागों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसका मकसद कृषि और जल प्रबंधन पर बारिश और ईएनएसओ के असर की जानकारी देना और उसे समझना है।

आईएमडी के बारे में

IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग, देश की राष्ट्रीय मौसम सेवा है। यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है और भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून बारिश पर अल नीनो के संभावित असर का आकलन करता है। देश में मौसम से जुड़े हर काम की मुख्य जिम्मेदारी इसी की है।

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (आएमडी) नियमित रूप से मौसम और जलवायु का पूर्वानुमान, मौसमी आउटलुक और बारिश, लू (हीटवेव) व अन्य चरम मौसम की घटनाओं से जुड़ी शुरुआती चेतावनियां जारी करता है। ये जानकारियां सभी संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों तक पहुंचाई जाती हैं ताकि वे तैयारी कर सकें और सही कदम उठा सकें।

इसके अलावा, आईएमडी मानसून की बारिश के बारे में रोजाना और अल नीनो की स्थितियों के बारे में हर महीने अपडेट देता है। आम तौर पर, अल नीनो की घटना के दौरान भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और अल नीनो की तीव्रता ही यह तय करती है कि मानसून पर कितना असर पड़ेगा।

IMD का मुख्य काम क्या है? 

आईएमडी सभी संबंधित लोगों को जिले और ब्लॉक स्तर पर बारिश की जानकारी भी देता है और पीएमओ, एमएचए, एमओएएफडब्ल्यू की बैठकों में नियमित रूप से शामिल होकर जरूरी जानकारी देता है। एमओएएफडब्ल्यू की 'क्रॉप वेदर वॉच' के तहत, आईएमडी हर हफ्ते पिछली बारिश और अगले दो हफ्तों के लिए बारिश का अनुमान बताता है।

मौसम की जानकारी देना :खेती, सिंचाई, जहाज, हवाई जहाज, तेल की खोज जैसी मौसम पर निर्भर गतिविधियों के लिए रोज़ का पूर्वानुमान देना।
खतरे की चेतावनी देना :चक्रवात, आंधी, भारी बारिश, बाढ़, गर्मी और ठंड की लहर जैसी आपदाओं की पहले से सूचना देना ताकि जान-माल बचाया जा सके।
आंकड़े और रिसर्च :सरकार, किसान, उद्योग और शोधकर्ताओं को मौसम के आंकड़े देना और मौसम विज्ञान पर शोध करना।

IMD की पृष्ठभूमि और इसका सफर

  • 1864 में कोलकाता और आंध्र तट पर आए भयानक चक्रवातों के बाद महसूस हुआ कि मौसम पर नजर रखने वाली कोई व्यवस्था होनी चाहिए। इसी जरूरत से 1875 में IMD की स्थापना हुई।शुरुआत में सिर्फ 1 अधिकारी HF ब्लैनफोर्ड थे। 1903 में गिल्बर्ट वॉकर के समय मानसून और अल नीनो को समझने में बड़ी प्रगति हुई।
  • आज 150 साल बाद IMD एक बड़े संगठन में बदल चुका है। देश भर में मौसम वेधशालाएं, रडार और ऑटोमैटिक स्टेशन लगाकर यह आम लोगों तक समय पर मौसम की सटीक जानकारी पहुंचाता है।

चक्रवात पूर्वानुमान से लेकर वैश्विक भूमिका तक - IMD का विकास

  • चक्रवात पूर्वानुमान में बड़ी उन्नति:-1999 के ओडिशा सुपर चक्रवात ने IMD के सामने बहुत बड़ी चुनौती रख दी थी। उस समय तकनीक और लोगों की कमी की वजह से नुकसान ज्यादा हुआ। उसके बाद IMD ने तकनीक और सिस्टम में भारी सुधार किया। नतीजा - आज चक्रवात से होने वाली मौतों में बहुत कमी आई है। अब IMD के चक्रवात पूर्वानुमान सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान समेत 13 पड़ोसी देशों के लिए भी जीवन-रक्षक बन गए हैं।
  • अब सिर्फ मौसम नहीं, कई काम:-पहले IMD सिर्फ मौसम बताता था। आज यह चुनाव, खेल आयोजन, अंतरिक्ष प्रक्षेपण, कृषि, आपदा प्रबंधन जैसी जगहों के लिए विशेष मौसम सेवाएं देता है।
  • वैश्विक पहचान:-बेहतर काम की वजह से IMD को अब दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय जलवायु केंद्र माना जाता है। साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र के 'सभी के लिए पूर्व चेतावनी - Early Warning for All' कार्यक्रम में भी मदद कर रहा है, जिसमें 30 देशों को शामिल किया गया है।

भारत में मौसम विज्ञान से संबंधित प्रमुख पहलें –

राष्ट्रीय मानसून मिशन - NMM :

शुरू: 2012, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा
उद्देश्य: मानसून की भविष्यवाणी की सटीकता बेहतर करना। खासकर अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक पूर्वानुमान।
कैसे: हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर, बेहतर मॉडल और डेटा एसेमिलेशन का इस्तेमाल।
महत्व: खेती, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन योजना के लिए सीधा फायदा।

 डॉप्लर वेदर रडार - DWR :

क्या है: यह रडार बारिश, बादल, तूफान, चक्रवात की गति और दिशा को रीयल-टाइम में ट्रैक करता है।
उद्देश्य:गंभीर मौसम की घटनाओं जैसे चक्रवात, भारी बारिश, ओलावृष्टि की 2-3 घंटे पहले सटीक चेतावनी देना।
महत्व: तटीय राज्यों और शहरों में आपदा-पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करता है। अभी देश भर में 30+ DWR लगे हैं।

 मौसम ऐप :

लॉन्च: 2016, IMD द्वारा
फीचर्स:जिले-वार 7 दिन का मौसम पूर्वानुमान चक्रवात, हीटवेव, बारिश की तुरंत चेतावनी कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन के लिए विशेष सलाह हिंदी + 12 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध।
महत्व: आम नागरिक तक सीधे और सरल भाषा में मौसम की जानकारी पहुंचाना।

निष्कर्ष

इस प्रकार अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जिसका प्रभाव केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। यह समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि और वायुदाब में बदलाव के कारण उत्पन्न होती है और इसके चलते कई क्षेत्रों में सूखा, गर्मी और मानसून में कमी देखी जाती है। चूंकि अल-नीनो अनियमित अंतराल पर आती है और इसका सटीक पूर्वानुमान कठिन है, इसलिए IMD जैसी एजेंसियों की समय पर निगरानी और चेतावनी प्रणालियां कृषि, जल प्रबंधन और आपदा तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

अल नीनो (El Nino) और इसके प्रभाव बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रपत्र-2  में शामिल भूगोल और अर्थव्यवस्था के पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण टॉपिक हैं।

Reference:
  1. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2294781&reg=48&lang=2

What rainfall forecast did IMD issue for the 2026 southwest monsoon season?

IMD forecast below-normal rainfall for 2026, about 10% below average. Its first-stage forecast issued 13 April 2026 predicted 92% (plus or minus 5%) of the Long Period Average (LPA), later revised to 90% (plus or minus 4%) in the second stage.

How did El Nino get its name?

Peruvian fishermen first noticed the sea off Peru's coast turning unusually warm around Christmas, and Spanish settlers named the phenomenon "El Nino," meaning "little boy" in Spanish.

What is El Nino scientifically, and what temperature change defines it?

El Nino is the warm phase of the El Nino Southern Oscillation (ENSO), occurring when sea surface temperature near South America's northern coast in the equatorial Pacific rises at least 0.5 degrees Celsius above normal. In the 2015-2016 event this difference reached 3 degrees Celsius.

How often does El Nino occur, and how many times has it happened since 1950?

El Nino occurs irregularly every 2 to 7 years. Since 1950 it has occurred 16 times, and in 7 of those instances Indian monsoon rainfall was below normal.

Has the Ministry of Earth Sciences issued district-wise risk guidelines for El Nino's 2026 impact?

No, the article states that the Ministry of Earth Sciences has not issued any district-wise risk and impact assessment study or guidelines for states to deal with the El Nino effect in 2026.

When was IMD established, and what triggered its creation?

IMD was established in 1875 after devastating cyclones hit Kolkata and the Andhra coast in 1864 highlighted the need for a weather monitoring system. H.F. Blanford was its first officer.

How has IMD's cyclone forecasting improved since the 1999 Odisha super cyclone?

After the 1999 Odisha super cyclone exposed gaps in technology and manpower, IMD significantly improved its systems, and its cyclone forecasts now also serve 13 neighbouring countries including Bangladesh, Sri Lanka, and Pakistan.

What is the National Monsoon Mission?

Launched in 2012 by the Ministry of Earth Sciences, it aims to improve the accuracy of short, medium, and long-term monsoon predictions using high-performance computers, better models, and data assimilation.

What does Doppler Weather Radar (DWR) do, and how many are installed in India?

DWR tracks rainfall, clouds, storms, and cyclone movement in real time, giving 2-3 hours advance warning of severe weather. Over 30 DWRs are currently installed across India.

How is this topic relevant to the BPSC syllabus?

El Nino and its effects form an important part of the Geography and Economy syllabus under BPSC Prelims and Mains General Studies Paper 2.

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