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'मिशन मौसम': मौसम पूर्वानुमान को मजबूत बनाना

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Written by Akhilesh Anand
Published: 11 August 20267 min read
'मिशन मौसम': मौसम पूर्वानुमान को मजबूत बनाना
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'मिशन मौसम': मौसम पूर्वानुमान को मजबूत बनाना

हाल ही में संसद में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 'मिशन मौसम' को लेकर कई जरूरी बातें बताईं। अब मौसम पहले जैसा नहीं रहा। वैज्ञानिकों का कहना है कि गहरे और घने बादल ज्यादा बन रहे हैं और साथ ही बहुत तेज़ बारिश की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। सैटेलाइट के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप और आसपास के समुद्रों में ऐसे बादलों की ऊंचाई और संख्या दोनों बढ़ी हैं। सबसे ज्यादा असर मध्य भारत में दिख रहा है। यहां मूसलाधार बारिश के दिन बढ़ गए हैं, जबकि बीच-बीच में होने वाली सामान्य बारिश कम हो गई है। इन्हीं बदलावों को समझने और लोगों तक सही समय पर सही जानकारी पहुंचाने के लिए सरकार ने 'मिशन मौसम' शुरू किया है।

उल्लेखनीय है कि 11 सितंबर 2024 को मोदी सरकार 3.0 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे हरी झंडी दी थी। सरकार ने महसूस किया कि बदलते मौसम में सटीक पूर्वानुमान अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है। इस मिशन का बड़ा लक्ष्य है - भारत को 'हर मौसम के लिए तैयार' और 'जलवायु स्मार्ट' बनाना। यानी बाढ़, सूखा, हीटवेव या चक्रवात - कोई भी चरम मौसम आए तो हम पहले से तैयार रहें और नुकसान कम हो।

इसका मुख्य उद्देश्य

जलवायु मॉडलिंग, उपग्रह अवलोकन और संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान को एकीकृत करके मॉनसून और चरम मौसम घटनाओं को बेहतर ढंग से समझना है।

मिशन मौसम के मुख्य बिंदु:

उन्नत मॉडल:महीने और मौसम की लंबी भविष्यवाणी के लिए Multi-Model Ensemble और Coupled Climate Models का उपयोग।
बेहतर NWP मॉडल:ज्यादा रिज़ॉल्यूशन, बेहतर डेटा एसिमिलेशन और HPC के जरिए संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान को अपग्रेड करना।
मजबूत अवलोकन नेटवर्क: नए Doppler Radar, AWS, ARG, Lightning Network, Wind Profiler आदि लगाना।
उपग्रह डेटा:स्वदेशी मौसम उपग्रहों के साथ NASA, NOAA, ESA, JMA आदि से रियल-टाइम डेटा लेकर NCMRWF में मिलाना।
आत्मनिर्भर सिस्टम:IMD का 'Decision Support System - DSS' और नागरिक-केंद्रित पूर्वानुमान।
जनता तक पहुंच: मोबाइल ऐप, SMS, टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया के साथ-साथ 'पंचायत मौसम सेवा पोर्टल' से पंचायत स्तर तक पूर्वानुमान और कृषि सलाह व्हाट्सऐप पर भेजना। कृषि सखी/पशु सखी नेटवर्क का भी उपयोग।
री-एनालिसिस डेटासेट:NCMRWF ने 25 किमी और 12 किमी रिज़ॉल्यूशन वाले ग्लोबल और रीजनल डेटासेट बनाए हैं, जो हीटवेव, चक्रवात, भारी बारिश जैसी घटनाओं के अध्ययन में मदद करते हैं।

अन्य पहल:

शोध सहयोग: IIT, विश्वविद्यालय, WMO और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ एक्स्ट्रा-म्यूरल प्रोजेक्ट।
IITM: मॉनसून मिशन फोरकास्ट सिस्टम के नए वर्जन के साथ Oceanic Flux, Land Surface Model जोड़कर मौसमी पूर्वानुमान बेहतर करना।

वर्तमान स्थिति

 देश भर में अब 37 से ज्यादा डॉप्लर मौसम रडार लग चुके हैं। इनकी वजह से अब हम बादलों और बारिश को बिल्कुल रियल-टाइम में ट्रैक कर पा रहे हैं।

 'मौसम' मोबाइल ऐप के जरिए भारत के 450 से ज्यादा शहरों के खास इलाकों तक का पिन-कोड वाला मौसम पूर्वानुमान लोगों के फोन तक पहुंच रहा है।

 राष्ट्रीय मानसून मिशन के तहत हमारे मौसम पूर्वानुमान के मॉडल काफी बेहतर हुए हैं। अब बारिश, तापमान और चरम घटनाओं का अंदाजा पहले से ज्यादा सटीक लग रहा है।

 सरकार ने खास तौर पर शहरी बाढ़ की भविष्यवाणी और चक्रवात की ट्रैकिंग के लिए अलग से प्रोग्राम भी शुरू किए हैं, ताकि शहरों को समय पर अलर्ट मिल सके। 

पूर्वोत्तर क्षेत्र पर खास ध्यान

पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ी जमीन और बदलता मौसम इसे सबसे ज्यादा संवेदनशील बनाता है:

यहां मानसून में बार-बार बाढ़ आती है जिससे लोगों की खेती और रोजगार दोनों पर असर पड़ता है।  तेज बारिश से भूस्खलन का खतरा भी बहुत ज्यादा रहता है, जिससे सड़कें, पुल और घरों को नुकसान पहुंचता है।

 इसीलिए 'मिशन मौसम' इस इलाके को प्राथमिकता दे रहा है: 

पहाड़ी इलाकों के हिसाब से नए मौसम स्टेशन, रडार और सेंसर लगाए जा रहे हैं। गांव-गांव और जिले स्तर तक लोकल पूर्वानुमान दिया जाएगा ताकि खतरे से पहले लोग सतर्क हो जाएं। 

राज्य सरकारों के साथ मिलकर मौसम के आंकड़ों को सीधे आपदा प्रबंधन की योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि रेस्क्यू और राहत जल्दी हो सके।

चुनौतियां

मिशन मौसम को महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:

1. भौगोलिक विविधता: भारत की विविधतापूर्ण स्थलाकृति को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए मिश्रित मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है।

2. जलवायु परिवर्तन की अनिश्चितता: वैश्विक स्तर पर जलवायु में तेजी से हो रहे परिवर्तन दीर्घकालिक भविष्यवाणियों को अधिक चुनौतीपूर्ण बना देते हैं।

3. बुनियादी ढांचे में फर्क: दूरदराज के क्षेत्रों में अभी भी रडार या स्वचालित मौसम केंद्र (एडब्ल्यूएस) जैसे अधिक अवलोकन संबंधी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है।

4. जागरूकता का स्तर: यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि किसान और ग्रामीण समुदाय पूर्वानुमान संबंधी जानकारी का प्रभावी तरीके से उपयोग करें। पूर्वानुमान संबंधी जानकारी का प्रभावी तरीके से उपयोग न होना एक प्रमुख बाधा बनी हुई है।

निष्कर्ष

'मिशन मौसम' जलवायु परिवर्तन से लड़ने की दिशा में भारत का एक बहुत बड़ा कदम है। बदलता मौसम अब सिर्फ मौसम विभाग का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर हमारी जिंदगी, खेती और रोजगार पर पड़ रहा है। इस मिशन के जरिए सरकार पूर्वानुमान को पहले से ज्यादा सटीक और तेज बना रही है। साथ ही ये जानकारी किसानों, पंचायतों और आम लोगों तक समय पर पहुंचे - ये भी सुनिश्चित किया जा रहा है। इससे न सिर्फ जान-माल की रक्षा होगी, बल्कि बाढ़, सूखा जैसी आपदाओं से होने वाला नुकसान भी कम होगा। खासकर पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील इलाकों के लिए ये मिशन बहुत अहम है। वहां बाढ़ और भूस्खलन आम बात है। बेहतर पूर्वानुमान और लोकल अलर्ट से वहां की चुनौतियों से निपटने में काफी मदद मिलेगी।आगे चलकर इस मिशन का फोकस रहेगा - नई तकनीक अपनाना, वैज्ञानिकों के साथ मिलकर शोध करना और लोगों में जागरूकता फैलाना। जब तकनीक + शोध + जागरूकता तीनों साथ आएंगे, तभी इसका असर जमीन पर दिखेगा। कुल मिलाकर, मिशन मौसम सिर्फ आपदाओं से बचाव का जरिया नहीं है। ये जलवायु के साथ ढलकर आगे बढ़ने और एक सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध भारत बनाने की नींव भी रखेगा।

'मिशन मौसम': मौसम पूर्वानुमान को मजबूत बनाने जैसे विषय बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रपत्र-2  में शामिल भूगोल और अर्थव्यवस्था के पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग हैं।

Reference:

  1. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2294811&reg=48&lang=2
  2. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2087348&reg=48&lang=2
When was Mission Mausam approved, and what is its main goal?

Mission Mausam was approved by the Union Cabinet under Modi government 3.0 on 11 September 2024, with the goal of making India "all-weather ready" and "climate smart" so the country is better prepared for floods, droughts, heatwaves, and cyclones.

What weather trend prompted Mission Mausam?

Scientists observed that deeper and denser clouds are forming more often along with a rise in very heavy rainfall events, with satellite data showing increases especially over Central India, where heavy downpour days are rising while normal intermittent rain days are falling.

What is the main objective of Mission Mausam?

To integrate climate modeling, satellite observation, and numerical weather prediction so that the monsoon and extreme weather events can be understood and forecast better.

What new observation infrastructure is being deployed under Mission Mausam?

New Doppler Radars, Automatic Weather Stations (AWS), Automatic Rain Gauges (ARG), Lightning Networks, and Wind Profilers are being installed to strengthen the observation network.

What is the "Panchayat Mausam Seva Portal"?

It is a channel under Mission Mausam that sends weather forecasts and agricultural advisories down to the panchayat level via WhatsApp, using the Krishi Sakhi/Pashu Sakhi network for outreach.

How many Doppler weather radars are currently installed in India according to the article?

More than 37 Doppler weather radars have been installed across the country, enabling real-time tracking of clouds and rainfall.

What does the "Mausam" mobile app offer?

It delivers pin-code level weather forecasts to more than 450 Indian cities.

Why does Mission Mausam give special focus to Northeast India?

The Northeast's hilly terrain and changing weather make it highly vulnerable to frequent monsoon floods and landslides that damage farming, livelihoods, roads, bridges, and homes, so the mission prioritizes new weather stations, radars, and local village/district-level forecasts there.

What challenges does Mission Mausam face despite its progress?

Challenges include India's geographic diversity requiring mixed regional models, uncertainty from climate change making long-term forecasts harder, infrastructure gaps in remote areas lacking radar or AWS coverage, and low effective use of forecast information among farmers and rural communities.

How is Mission Mausam relevant to the BPSC syllabus?

The topic is an important part of the Geography and Economy syllabus under BPSC Prelims and Mains General Studies Paper 2.

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